हरसिंगार/ Nyctanthes arbor-tristis
हरसिंगार यानी हरि का श्रृंगार!
इसके और भी कई नाम हैं ; शेफालिका , पारिजात , शिवली , मल्लिका ,
स्वर्णमल्लिका और अंग्रेजी में इसे night jasmine कहते हैं . इसके
पुष्प रात को खिलते हैं. पूरी रात सुगंधी बिखेरता हुआ यह वृक्ष भोर होते ही
अपने सभी फूल पृथ्वी पर बिखेर देता है . अलौकिक सुगंध में सराबोर इसके
पुष्प केवल मन को ही प्रसन्न नहीं करते ; तन को भी शक्ति देते हैं
. हरसिंगार जिसे नाइट जैस्मिन भी कहते हैं, एक सुन्दर झाड़ीनुमा छोटा पेड़
है, जिस पर सुन्दर व सुगन्धित फूल लगते हैं। हरसिंगार उन प्रमुख पेड़ों में
से एक है, जिसके फूल ईश्वर की आराधना में महत्वपूर्ण स्थान रखते है। लेकिन
क्या आप जानते हैं कि इसके फूल, पत्ते और छाल का उपयोग औषधि के रूप में
किया जाता है। यह लगभग पूरे भारत में पाया जाता है। इसके पत्तों में टेनिक
एसिड, मैथिल सिलसिलेट और ग्लूकोसाइड होता है ये द्रव्य औषधीय गुणों से
भरपूर हैं। इसके पत्तों का सबसे अच्छा उपयोग सायटिका रोग को दूर करने में
किया जाता है।
इस वृक्ष के फूल सर्वथा भगवान के श्रृंगार के लिए उपयुक्त हैं
हरसिंगार के लाभ / गुण / फायदे
शारीरिक विकास में हरसिंगार का प्रयोग :- इसके फूलों को छाया में सुखाकर पावडर कर लीजिये और फिर मिश्री मिलाकर खाली पेट लीजिए शारीरिक शक्ति का विकास होगा .
जोड़ों के दर्द में हरसिंगार के प्रयोग :-
जोड़ों का दर्द होने पर इसके पंचांग का काढ़ा पीजिए . 5 gram पंचांग +400
ग्राम पानी लेकर धीमी आंच पर पकाएं . जब एक तिहाई रह जाए तो खाली पेट पीयें
.
खांसी में हरसिंगार के प्रयोग
:- इसकी दो पत्तियां +एक फूल +तुलसी के पत्ते ! ये सब लेकर इसको एक गिलास
पानी में उबालें और चाय की तरह पी लें . इससे पेट का जमा हुआ मल भी निकल
जाएगा .
पेट में कीड़े में हरसिंगार के प्रयोग :- पत्तों
का रस लें .छोटा बच्चा है तो एक चम्मच और बड़ा व्यक्ति है तो दो चम्मच .
सुबह खाली पेट थोडा पानी और चीनी मिलाकर लें . साल में कभी-कभी यह रस ले
लें तो पेट में कीड़े होंगे ही नहीं .
पुराने बुखार में हरसिंगार के प्रयोग :- पुराना बुखार हो या शरीर की टूटन हो तो , इसकी तीन ग्राम छाल +दो पत्तियां +3-4 तुलसी की पत्तियां पानी में उबालकर सुबह शाम लें .
Sciatica की बीमारी में हरसिंगार के प्रयोग :- Sciatica का तो इलाज ही यह पेड़ है . इसके दो तीन बड़े पत्तों का काढ़ा सवेरे शाम खाली पेट पीयें .
बवासीर में हरसिंगार के प्रयोग :- बवासीर
के लिए इसके बीज रामबाण औषधि की तरह काम करते हैं। इसके एक बीज का सेवन
प्रतिदिन करने से बवासीर ठीक हो जाता है। या हारसिंगार के बीज 10 ग्राम तथा
कालीमिर्च 3 ग्राम को मिलाकर पीस लें और चने के बराबर आकार की गोलियां
बनाकर खायें। रोजाना 1-1 गोली गुनगुने जल के साथ सुबह-शाम खाने से बवासीर
ठीक होती है। यदि गुदाद्वार में सूजन या मस्से की समस्या है तो हरसिंगार
के बीजों का लेप बनाकर गुदे पर लगाने से लाभ मिलता है।
सूजन में में में हरसिंगार के प्रयोग :- शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन है तो इसकी पत्तियाँ पानी में उबालकर उससे झराई करें . सूजन पर इसके पत्तों को बांधें .
चीन और ताईवान जैसे देशों में तो इसके फूल पत्तों की हर्बल चाय पीते हैं . इसके दो पत्ते और चार फूल लेकर पांच कप चाय बना सकते हैं . बिना दूध की यह चाय स्फूर्तिदायक होती है .
विशेष :- यह वृक्ष
आसपास लगा हो खुशबू तो प्रदान करता ही है ; साथ ही नकारात्मक उर्जा को भी
भगाता है . इस उपयोगी वृक्ष को अवश्य ही घर के आसपास लगाना चाहिए .
/ Nyctanthes arbor-tristis
हरसिंगार यानी हरि का श्रृंगार!
इसके और भी कई नाम हैं ; शेफालिका , पारिजात , शिवली , मल्लिका ,
स्वर्णमल्लिका और अंग्रेजी में इसे night jasmine कहते हैं . इसके
पुष्प रात को खिलते हैं. पूरी रात सुगंधी बिखेरता हुआ यह वृक्ष भोर होते ही
अपने सभी फूल पृथ्वी पर बिखेर देता है . अलौकिक सुगंध में सराबोर इसके
पुष्प केवल मन को ही प्रसन्न नहीं करते ; तन को भी शक्ति देते हैं
. हरसिंगार जिसे नाइट जैस्मिन भी कहते हैं, एक सुन्दर झाड़ीनुमा छोटा पेड़
है, जिस पर सुन्दर व सुगन्धित फूल लगते हैं। हरसिंगार उन प्रमुख पेड़ों में
से एक है, जिसके फूल ईश्वर की आराधना में महत्वपूर्ण स्थान रखते है। लेकिन
क्या आप जानते हैं कि इसके फूल, पत्ते और छाल का उपयोग औषधि के रूप में
किया जाता है। यह लगभग पूरे भारत में पाया जाता है। इसके पत्तों में टेनिक
एसिड, मैथिल सिलसिलेट और ग्लूकोसाइड होता है ये द्रव्य औषधीय गुणों से
भरपूर हैं। इसके पत्तों का सबसे अच्छा उपयोग सायटिका रोग को दूर करने में
किया जाता है।
इस वृक्ष के फूल सर्वथा भगवान के श्रृंगार के लिए उपयुक्त हैं
हरसिंगार के लाभ / गुण / फायदे
शारीरिक विकास में हरसिंगार का प्रयोग :- इसके फूलों को छाया में सुखाकर पावडर कर लीजिये और फिर मिश्री मिलाकर खाली पेट लीजिए शारीरिक शक्ति का विकास होगा .
जोड़ों के दर्द में हरसिंगार के प्रयोग :-
जोड़ों का दर्द होने पर इसके पंचांग का काढ़ा पीजिए . 5 gram पंचांग +400
ग्राम पानी लेकर धीमी आंच पर पकाएं . जब एक तिहाई रह जाए तो खाली पेट पीयें
.
खांसी में हरसिंगार के प्रयोग
:- इसकी दो पत्तियां +एक फूल +तुलसी के पत्ते ! ये सब लेकर इसको एक गिलास
पानी में उबालें और चाय की तरह पी लें . इससे पेट का जमा हुआ मल भी निकल
जाएगा .
पेट में कीड़े में हरसिंगार के प्रयोग :- पत्तों
का रस लें .छोटा बच्चा है तो एक चम्मच और बड़ा व्यक्ति है तो दो चम्मच .
सुबह खाली पेट थोडा पानी और चीनी मिलाकर लें . साल में कभी-कभी यह रस ले
लें तो पेट में कीड़े होंगे ही नहीं .
पुराने बुखार में हरसिंगार के प्रयोग :- पुराना बुखार हो या शरीर की टूटन हो तो , इसकी तीन ग्राम छाल +दो पत्तियां +3-4 तुलसी की पत्तियां पानी में उबालकर सुबह शाम लें .
Sciatica की बीमारी में हरसिंगार के प्रयोग :- Sciatica का तो इलाज ही यह पेड़ है . इसके दो तीन बड़े पत्तों का काढ़ा सवेरे शाम खाली पेट पीयें .
बवासीर में हरसिंगार के प्रयोग :- बवासीर
के लिए इसके बीज रामबाण औषधि की तरह काम करते हैं। इसके एक बीज का सेवन
प्रतिदिन करने से बवासीर ठीक हो जाता है। या हारसिंगार के बीज 10 ग्राम तथा
कालीमिर्च 3 ग्राम को मिलाकर पीस लें और चने के बराबर आकार की गोलियां
बनाकर खायें। रोजाना 1-1 गोली गुनगुने जल के साथ सुबह-शाम खाने से बवासीर
ठीक होती है। यदि गुदाद्वार में सूजन या मस्से की समस्या है तो हरसिंगार
के बीजों का लेप बनाकर गुदे पर लगाने से लाभ मिलता है।
सूजन में में में हरसिंगार के प्रयोग :- शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन है तो इसकी पत्तियाँ पानी में उबालकर उससे झराई करें . सूजन पर इसके पत्तों को बांधें .
चीन और ताईवान जैसे देशों में तो इसके फूल पत्तों की हर्बल चाय पीते हैं . इसके दो पत्ते और चार फूल लेकर पांच कप चाय बना सकते हैं . बिना दूध की यह चाय स्फूर्तिदायक होती है .
विशेष :- यह वृक्ष
आसपास लगा हो खुशबू तो प्रदान करता ही है ; साथ ही नकारात्मक उर्जा को भी
भगाता है . इस उपयोगी वृक्ष को अवश्य ही घर के आसपास लगाना चाहिए .