Thursday, 11 April 2019

कदमो से कदमो के निशान मत छीनो... #GanvKiZindagi #MeraGanv #MeraGanvMeriShaan #GanvkiSiskiya #MartaHUaGanv

कदमो से कदमो के निशान मत छीनो,
मुझसे मेरी पहचान मत छीनो ,
चकाचौंध शहर की स्वार्थी  कर देगी मुझे ,
मुझसे मेरे गांव का स्वाभिमान मत छीनो,


मैं मरने के बाद भी जीना चाहता हूँ
दुसरो के हिस्से का गम भी पीना चाहता हूँ
मुस्कराहट आ जाये किसी मजबूर  के चेहरे पर मुझे देख कर
उसके फटे अंतर्मन को सीना चाहता हूँ ।


To Be Continued...

Friday, 6 July 2018

हरसिंगार #Harsingar_Ke_Labh #Green_India, #हरसिंगार_के_फायदे_और_नुकसान

हरसिंगार/ Nyctanthes arbor-tristis

हरसिंगार यानी हरि का श्रृंगार!  इसके और भी कई नाम हैं ; शेफालिका , पारिजात , शिवली , मल्लिका , स्वर्णमल्लिका और अंग्रेजी में इसे night jasmine कहते हैं . इसके पुष्प रात को खिलते हैं. पूरी रात सुगंधी बिखेरता हुआ यह वृक्ष भोर होते ही अपने सभी फूल पृथ्वी पर बिखेर देता है . अलौकिक सुगंध में सराबोर इसके पुष्प केवल मन को ही प्रसन्न नहीं करते ; तन को भी शक्ति देते हैं . हरसिंगार जिसे नाइट जैस्मिन भी कहते हैं, एक सुन्दर झाड़ीनुमा छोटा पेड़ है, जिस पर सुन्दर व सुगन्धित फूल लगते हैं। हरसिंगार उन प्रमुख पेड़ों में से एक है, जिसके फूल ईश्वर की आराधना में महत्वपूर्ण स्थान रखते है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि इसके फूल, पत्ते और छाल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। यह लगभग पूरे भारत में पाया जाता है। इसके पत्तों में टेनिक एसिड, मैथिल सिलसिलेट और ग्लूकोसाइड होता है ये द्रव्य औषधीय गुणों से भरपूर हैं। इसके पत्तों का सबसे अच्छा उपयोग सायटिका रोग को दूर करने में किया जाता है।
 Image result for harsingar
इस वृक्ष के फूल सर्वथा भगवान के श्रृंगार के लिए उपयुक्त हैं

हरसिंगार के लाभ / गुण / फायदे 

शारीरिक विकास में हरसिंगार का प्रयोग :- इसके फूलों को छाया में सुखाकर पावडर कर लीजिये और फिर मिश्री मिलाकर खाली पेट लीजिए शारीरिक शक्ति का विकास होगा .
जोड़ों के दर्द में हरसिंगार के प्रयोग :- जोड़ों का दर्द होने पर इसके पंचांग का काढ़ा पीजिए . 5 gram पंचांग +400 ग्राम पानी लेकर धीमी आंच पर पकाएं . जब एक तिहाई रह जाए तो खाली पेट पीयें .
खांसी में हरसिंगार के प्रयोग :- इसकी दो पत्तियां +एक फूल +तुलसी के पत्ते !  ये सब लेकर इसको एक गिलास पानी में उबालें और चाय की तरह पी लें . इससे पेट का जमा हुआ मल भी निकल जाएगा .
पेट में कीड़े में हरसिंगार के प्रयोग :-  पत्तों का रस लें .छोटा बच्चा है तो एक चम्मच और बड़ा व्यक्ति है तो दो चम्मच . सुबह खाली पेट थोडा पानी और चीनी मिलाकर लें . साल में कभी-कभी यह रस ले लें तो पेट में कीड़े होंगे ही नहीं .
पुराने बुखार में हरसिंगार के प्रयोग :- पुराना बुखार हो या शरीर की टूटन हो तो , इसकी तीन ग्राम छाल +दो पत्तियां +3-4 तुलसी की पत्तियां पानी में उबालकर सुबह शाम लें .
Sciatica की बीमारी में हरसिंगार के प्रयोग :- Sciatica का तो इलाज ही यह पेड़ है . इसके दो तीन बड़े पत्तों का काढ़ा सवेरे शाम खाली पेट पीयें .
बवासीर में हरसिंगार के प्रयोग :- बवासीर के लिए इसके बीज रामबाण औषधि की तरह काम करते हैं। इसके एक बीज का सेवन प्रतिदिन करने से बवासीर ठीक हो जाता है। या हारसिंगार के बीज 10 ग्राम तथा कालीमिर्च 3 ग्राम को मिलाकर पीस लें और चने के बराबर आकार की गोलियां बनाकर खायें। रोजाना 1-1 गोली गुनगुने जल के साथ सुबह-शाम खाने से बवासीर ठीक होती है। यदि गुदाद्वार में सूजन या मस्से की समस्‍या है तो हरसिंगार के बीजों का लेप बनाकर गुदे पर लगाने से लाभ मिलता है।
सूजन में में में हरसिंगार के प्रयोग :- शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन है तो इसकी पत्तियाँ पानी में उबालकर उससे झराई करें . सूजन पर इसके पत्तों को बांधें .
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चीन और ताईवान जैसे देशों में तो इसके फूल पत्तों की हर्बल चाय पीते हैं . इसके दो पत्ते और चार फूल लेकर पांच कप चाय बना सकते हैं . बिना दूध की यह चाय स्फूर्तिदायक होती है .
विशेष :- यह वृक्ष आसपास लगा हो खुशबू तो प्रदान करता ही है ; साथ ही नकारात्मक उर्जा को भी भगाता है . इस उपयोगी वृक्ष को अवश्य ही घर के आसपास लगाना चाहिए .

/ Nyctanthes arbor-tristis

हरसिंगार यानी हरि का श्रृंगार!  इसके और भी कई नाम हैं ; शेफालिका , पारिजात , शिवली , मल्लिका , स्वर्णमल्लिका और अंग्रेजी में इसे night jasmine कहते हैं . इसके पुष्प रात को खिलते हैं. पूरी रात सुगंधी बिखेरता हुआ यह वृक्ष भोर होते ही अपने सभी फूल पृथ्वी पर बिखेर देता है . अलौकिक सुगंध में सराबोर इसके पुष्प केवल मन को ही प्रसन्न नहीं करते ; तन को भी शक्ति देते हैं . हरसिंगार जिसे नाइट जैस्मिन भी कहते हैं, एक सुन्दर झाड़ीनुमा छोटा पेड़ है, जिस पर सुन्दर व सुगन्धित फूल लगते हैं। हरसिंगार उन प्रमुख पेड़ों में से एक है, जिसके फूल ईश्वर की आराधना में महत्वपूर्ण स्थान रखते है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि इसके फूल, पत्ते और छाल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। यह लगभग पूरे भारत में पाया जाता है। इसके पत्तों में टेनिक एसिड, मैथिल सिलसिलेट और ग्लूकोसाइड होता है ये द्रव्य औषधीय गुणों से भरपूर हैं। इसके पत्तों का सबसे अच्छा उपयोग सायटिका रोग को दूर करने में किया जाता है।
इस वृक्ष के फूल सर्वथा भगवान के श्रृंगार के लिए उपयुक्त हैं

हरसिंगार के लाभ / गुण / फायदे 

शारीरिक विकास में हरसिंगार का प्रयोग :- इसके फूलों को छाया में सुखाकर पावडर कर लीजिये और फिर मिश्री मिलाकर खाली पेट लीजिए शारीरिक शक्ति का विकास होगा .
जोड़ों के दर्द में हरसिंगार के प्रयोग :- जोड़ों का दर्द होने पर इसके पंचांग का काढ़ा पीजिए . 5 gram पंचांग +400 ग्राम पानी लेकर धीमी आंच पर पकाएं . जब एक तिहाई रह जाए तो खाली पेट पीयें .
खांसी में हरसिंगार के प्रयोग :- इसकी दो पत्तियां +एक फूल +तुलसी के पत्ते !  ये सब लेकर इसको एक गिलास पानी में उबालें और चाय की तरह पी लें . इससे पेट का जमा हुआ मल भी निकल जाएगा .
पेट में कीड़े में हरसिंगार के प्रयोग :-  पत्तों का रस लें .छोटा बच्चा है तो एक चम्मच और बड़ा व्यक्ति है तो दो चम्मच . सुबह खाली पेट थोडा पानी और चीनी मिलाकर लें . साल में कभी-कभी यह रस ले लें तो पेट में कीड़े होंगे ही नहीं .
पुराने बुखार में हरसिंगार के प्रयोग :- पुराना बुखार हो या शरीर की टूटन हो तो , इसकी तीन ग्राम छाल +दो पत्तियां +3-4 तुलसी की पत्तियां पानी में उबालकर सुबह शाम लें .
Sciatica की बीमारी में हरसिंगार के प्रयोग :- Sciatica का तो इलाज ही यह पेड़ है . इसके दो तीन बड़े पत्तों का काढ़ा सवेरे शाम खाली पेट पीयें .
बवासीर में हरसिंगार के प्रयोग :- बवासीर के लिए इसके बीज रामबाण औषधि की तरह काम करते हैं। इसके एक बीज का सेवन प्रतिदिन करने से बवासीर ठीक हो जाता है। या हारसिंगार के बीज 10 ग्राम तथा कालीमिर्च 3 ग्राम को मिलाकर पीस लें और चने के बराबर आकार की गोलियां बनाकर खायें। रोजाना 1-1 गोली गुनगुने जल के साथ सुबह-शाम खाने से बवासीर ठीक होती है। यदि गुदाद्वार में सूजन या मस्से की समस्‍या है तो हरसिंगार के बीजों का लेप बनाकर गुदे पर लगाने से लाभ मिलता है।
सूजन में में में हरसिंगार के प्रयोग :- शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन है तो इसकी पत्तियाँ पानी में उबालकर उससे झराई करें . सूजन पर इसके पत्तों को बांधें .
चीन और ताईवान जैसे देशों में तो इसके फूल पत्तों की हर्बल चाय पीते हैं . इसके दो पत्ते और चार फूल लेकर पांच कप चाय बना सकते हैं . बिना दूध की यह चाय स्फूर्तिदायक होती है .
विशेष :- यह वृक्ष आसपास लगा हो खुशबू तो प्रदान करता ही है ; साथ ही नकारात्मक उर्जा को भी भगाता है . इस उपयोगी वृक्ष को अवश्य ही घर के आसपास लगाना चाहिए .

Sunday, 5 November 2017

Art Compitetion about Clean India and Beti Bachao Beti Padhao... #BetiBachaoBetiPadhaoInHindi

हरियाणा के पानीपत में 22 जनवरी 2015 को पीएम नरेन्द्र मोदी के द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नाम से एक सरकारी योजना की शुरुआत हुई। भारतीय समाज में लड़कियों की दयनीय दशा को देखते हुए इस कार्यक्रम की शुरुआत की गयी। आँकड़ों के अनुसार, 1991 में (0-6 वर्ष के उम्र के) हर 1000 लड़कों पर 945 लड़कियाँ है, जबकि 2001 में लड़कियों की संख्या 927 पर और दुबारा 2011 में इसमें गिरावट होते हुए ये 1000 लड़कों पर 918 पर आकर सिमट गयी। अगर हम सेंसस के आँकड़ों पर गौर करें तो पाएँगे कि हर दशक में लड़कियों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज हुई है। ये धरती पर जीवन की संभावनाओं के लिये भी खतरे का निशान है। अगर जल्द ही लड़कियों से जुड़े ऐसे मुद्दों को सुलझाया नहीं गया तो आने वाले दिनों में धरती बिना नारियों की हो जायेगी और तथा कोई नया जन्म नहीं होगा।
देश में लड़कियों के बुरे आँकड़ों को ध्यान में रखते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत की। ये बेहद प्रभावकारी योजना है जिसके तहत लड़कियों की संख्या में सुधार, इनकी सुरक्षा, शिक्षा, कन्या भ्रूण हत्या का उन्मूलन, व्यक्तिगत और पेशेवर विकास आदि का लक्ष्य पूरे देश भर में है।  इसे सभी राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू करने के लिये एक राष्ट्रीय अभियान के द्वारा देश (केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय, स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय) के 100 चुनिंदा शहरों में इस योजना को लागू किया गया है। इसमें कुछ सकारात्मक पहलू ये है कि ये योजना लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराध और गलत प्रथाओं को हटाने के लिये एक बड़े कदम के रुप में साबित होगा। हम ये आशा करते हैं कि आने वाले दिनों में सामाजिक-आर्थिक कारणों की वजह से किसी भी लड़की को गर्भ में नहीं मारा जायेगा, अशिक्षित नहीं रहेंगी, असुरक्षित नहीं रहेंगी, बलात्कार नहीं होगा आदि। अत: पूरे देश में लैंगिक भेदभाव को मिटाने के द्वारा बेटी-बचाओ बेटी-पढ़ाओ योजना का लक्ष्य लड़कियों को आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह से स्वतंत्र बनाने का है।





स्वच्छता ही सेवा Creative future of India #NYKS #GauravBhardwaj #NYVRajpura #SikheraMeerut #Salarpur

स्वच्छता ही सेवा अभियान के अंतर्गत सिखेड़ा व् सलारपुर के जूनियर हाई स्कूल में करायी गयी चित्रकला प्रतोयोगिता के विजेता छात्रो को सम्मानित किया गया। सिखेड़ा में बच्चों को सर्टिफिकेट व् मैडल देकर ग्राम प्रधान श्री नवीन चौहान जी व् राष्ट्रिय स्वयं सेवक गौरव भारद्वाज ने सम्मानित किया।
   यहाँ स्वाति चौहान ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
कार्यक्रम में प्रधानचार्य श्रीमती संगीता जी व् श्री अशोक जी ने बच्चों को स्वच्छता के प्रति अपने घरवालो को भी जागरूक करने को कहा।
इसी श्रंखला के अन्तर्गत बच्चों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए सलारपुर के जूनियर हाई स्कूल में करायी गयी चित्रकला प्रतियोगिता के विजेता छात्रो को भी सर्टिफिकेट व् मैडल देकर ग्राम प्रधान श्री कुंवर साहब भरद्वाज जी व् NYV अंशुल गुप्ता ने सम्मानित किया । यह देवा  ने बेहद सुंदर चित्र बनाकर प्रथम स्थान हासिल किया। प्रधानाचार्य श्रीमती सरवत जहाँ जी व् अन्य अध्यापको ने टीम का पूरा सहयोग किया।

कार्यक्रम में नेहरू युवा केंद्र से राष्ट्रीय स्वयं सेवक गौरव भारद्वाज और अंशुल गुप्ता  और युवा मंडल के पदाधिकारी पंकज,निखिल  शर्मा,अरविन्द प्रजापति उपस्थित रहे।

Thursday, 5 October 2017

पौधरोपण का महत्व || आप प्रकृति को बचाओ बाकी सब कुछ स्वयं बच जाएगा || वृक्षारोपण से लाभ #Plantation #SikheraMeerut #RajpuraBlockNYV

आप प्रकृति को बचाओ बाकी सब कुछ स्वयं बच जाएगा ....
जब से दुनिया शुरू हुई है, तभी से इंसान और क़ुदरत के बीच गहरा रिश्ता रहा है। पेड़ों से पेट भरने के लिए फल-सब्ज़ियां और अनाज मिला। तन ढकने के लिए कपड़ा मिला। घर के लिए लकड़ी मिली। इनसे जीवनदायिनी ऑक्सीज़न भी मिलती है, जिसके बिना कोई एक पल भी ज़िन्दा नहीं रह सकता। इनसे औषधियां मिलती हैं। पेड़ इंसान की ज़रूरत हैं, उसके जीवन का आधार हैं। अमूमन सभी मज़हबों में पर्यावरण संरक्षण पर ज़ोर दिया गया है। भारतीय समाज में आदिकाल से ही पर्यावरण संरक्षण को महत्व दिया गया है। भारतीय संस्कृति में पेड़-पौधों को पूजा जाता है। विभिन्न वृक्षों में विभिन्न देवताओं का वास माना जाता है। पीपल, विष्णु और कृष्ण का, वट का वृक्ष ब्रह्मा, विष्णु और कुबेर का माना जाता है, जबकि तुलसी का पौधा लक्ष्मी और विष्णु, सोम चंद्रमा का, बेल शिव का, अशोक इंद्र का, आम लक्ष्मी का, कदंब कृष्ण का, नीम शीतला और मंसा का, पलाश ब्रह्मा और गंधर्व का, गूलर विष्णू रूद्र का और तमाल कृष्ण का माना जाता है। इसके अलावा अनेक पौधे ऐसे हैं, जो पूजा-पाठ में काम आते हैं, जिनमें महुआ और सेमल आदि शामिल हैं। वराह पुराण में वृक्षों का महत्व बताते हुए कहा गया है- जो व्यक्ति एक पीपल, एक नीम, एक बड़, दस फूल वाले पौधे या बेलें, दो अनार दो नारंगी और पांच आम के वृक्ष लगाता है, वह नरक में नहीं जाएगा।

यह हैरत और अफ़सोस की ही बात है कि जिस देश में, समाज में पेड़-पौधों को पूजने की प्रथा रही है, अब उसी देश में, उसी समाज में पेड़ कम हो रहे हैं। बदलते दौर के साथ लोगों का प्रकृति से रिश्ता टूटने लगा। बढ़ती आबादी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए वृक्षों को काटा जा रहा है। नतीजतन जंगल ख़त्म हो रहे हैं। देश में वन क्षेत्रफल 19.2 फ़ीसद है, जो बहुत ही कम है। इससे पर्यावरण के सामने संकट खड़ा हो गया है। घटते वन क्षेत्र को राष्ट्रीय लक्ष्य 33.3 फ़ीसद के स्तर पर लाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा वृक्ष लगाने होंगे। साथ ही ख़ुशनुमा बात यह भी है कि अब जनमानस में पर्यावरण के प्रति जागरूकता आ रही है। लोग अब पेड़-पौधों की अहमियत को समझने लगे हैं। महिलाएं भी इस पुनीत कार्य में बढ़ चढ़कर शिरकत कर रही हैं।

बच्चो को पौधरोपण के लिए प्रोत्साहित करते हुए स्वयं भी यही अनुभूति हुई .

इस वैश्विक महामारी कोरोना ने ऑक्सीजन के लिए इंसान को दर- बदर भटकने को मजबूर कर दिया, या यूं कहें कि वृक्षों ने उन्हें अपनी औकात बता दिया। 

 हरियाली से ही जीवन बनता है। क्योंकि जीवन जीने के लिए हमें शुद्ध आक्सीजन की आवश्यकता होती है ।

जो हमें केवल पेड़ों से ही प्राप्त होती है।   लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित करें। इससे यह प्रेरणा मिलती है, कि जीवनदायिनी ऑक्सीजन को बचाने और उसका भविष्य में सदुपयोग होगा। इसके लिए सभी को आगे बढ़कर पौधरोपण करना चाहिए।  बबूल एक ऐसा प्राकृतिक ट्री गार्ड है जो पौधों को भेड़ बकरियों से सुरक्षा प्रदान करती है।



शौचालय में पानी को व्यर्थ बहाने से रोका जाना आवश्यक #SaveWaterInToilet #WaterInToilet

माननीय भारत ,

हम सब कुछ क्रर सकते हैं किन्तु बिन पानी के नहीं जी सकते.  कल तक मुफ्त में प्रकृति का दिए ये उपहार आज बोतलों में २०-२० रूपये में बिकने लगा है ; कल को शायद कीमते और भी बढ़ जाए .
खुले में शौच को रोकने के लिए घर घर शौचालय बनवाये जा रहे हैं,
जिससे पानी का उपयोग भी बढ़ जायेगा.
सरकार से निवेदन है की लोगो स्वच्छ पीने योग्य जल को वहा न प्रयोग करने के लिए भी जागरूक करे. क्युकी अगले कुछ दिनों में जो सबसे भयावह संकट आ सकता है वो पानी की किल्लत का होगा. इसके लिए कई शोध व् नयी टेक्नोलॉजी को भी बढ़ावा देना आवश्यक है की वो अशुद्ध पानी को फ्लश में प्रयोग करने व् नित्य कर्म के लिए सामान्य पानी यानी पीने के अयोग्य का प्रयोग होना सुनिश्चित करे .

मैं गांव मेरठ के एक छोटे से गांव सिखेड़ा का निवासी हूँ. यूँ तो हमारा गांव हर प्रकार से संपन्न था और फिलहाल  है भी किन्तु पिछले कुछ दिनों में जलस्तर बुरी तरह गिरा है, ...
हमारे गांव के पास से एक काली नदी बहा करती थी जो अब ख़त्म हो चुकी है या फिर फैक्ट्रीज के लिए नाले का काम करती है,नदी को कागजो पर पुनर्जीवित करने का काम पिछले कई दशक से किया जा रहा है कित्नु स्थिति बद से बदतर हो गयी है .

एक और तो हम हाथ धोने के बाद टंकी को बंद करने की सलाह देते हैं दूसरी और एक दिन में  यूँ टॉयलेट के इस्तेमाल से करोडो लीटर पानी की बर्बादी होती है..
गाँवो में तो एक शौच के बाद एक बाल्टी कम से कम  डाली ही जाती है यानि ६ लीटर पानी रोजाना एक समय में एक व्यक्ति इस्तेमाल क्र लेता है.

मेरा अनुरोध इस पानी को बचाने के लिए है ,,,ताकि हम इसे जितना कम व् पर्याप्त हो सके इस्तेमाल करे.
व्यक्तिगत स्तर  पर मैं जो कुछ कर सकता हूँ कर रहा हूँ किन्तु इसके लिए भी शायद  स्वच्छ भारत,व् शौचमुक्त भारत जैसे अभियान भविष्य में सरकार चलाये .

एक भारतीय
गौरव भारद्वाज







Friday, 4 August 2017

स्वच्छता पखवाड़े के उपलक्ष्य में युवाओ ने किया पौधरोपण


भारत सरकार द्वारा अगस्त माह के प्रथम पखवाड़े को स्वच्छता पखवाड़ा घोषित किया गया है I रजपुरा ब्लॉक में स्वच्छता पखवाड़े के अंतर्गत ब्लॉक के विभिन्न गाँवो में सफाई कार्यक्रम एवं पौधरोपण का कार्य किया जा रहा है I नेहरू युवा केन्द्र, युवा कार्यक्रम एवम् खेल मंत्रालय भारत सरकार के तत्वावधान में रजपुरा ब्लॉक के स्वयंसेवक गौरव भारद्वाज और अंशुल गुप्ता ने सिखेरा गांव में प्राथमिक विद्यालय में तथा सलारपुर में पौधरोपण किया Iविद्यालय के शिक्षकों ने पौधरोपण और स्वच्छता के बारे में बच्चो को जागरूक किया
कार्यक्रम की शुरुवात युवाओ को स्वच्छता की शपथ दिला कर की गयी I युवाओ को पर्यावरण की रक्षा में उनके योगदान की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया गया I  कार्यक्रम में आज़ाद युवा मंडल के अरविन्द, रवि, आशीष, पंकज व् मेक ए  डिफरेंस यूथ क्लब के अश्वनी,विनीत,सौरव,प्रदीप आदि सहित काफी संख्या में युवाओ ने योगदान दिया।